A short humorous story on Donkey and an imaginary rope

3 दिसम्बर 1984: अनजाना हादसा या एक सोची समझी चाल?

3 दिसम्बर की वो भयानक रात शायद ही कोई भूल पाया होगा।  उस रात को आज 32 साल हो गए है लेकिन  जब भी उस बात का जिक्र हमारी जुबा पर होता है तो ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात हो। भोपाल के इतिहास में एक ऐसा दर्दनाक दिन जुड़ चूका है जिसका अहसास आज भी होता है वो जहरीली गैस ने उस वक्त  सिर्फ हजारो की जान ही नही ली बल्कि उस जहरीली गैस का प्रभाव आज तक लोगो के जहन  मैं है भोपाल में हुए इस दर्नाक हादसे को पूरी दुनिया जानती है जिसमे कई लोगो ने अपनी जान तो खो ही दी थी  और लाखो को आज भी वो भयानक हादसा सोने नही देता।  लेकिन क्या आपको सही में लगता है की वो हादसा अनजाने में हुआ था? आखिर कैसे इतनी बड़ी फैक्ट्री में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? ये सब अनजाने में हुआ था या इसके पीछे एक सोची समझी चाल थी



 ऐसे बहुत से सवाल है जिनका जवाब किसीको नही मिला और आज भी लोग अपने हक़ के लिए भगावत कर रहे है। लेकिन उस हादसे के पीछे के कारण से आज भी लोग अनजान है कुछ ऐसी राज़ जिनको जान कर आपके पैरो तले जमीन खिसक जाएगी। 
आइये जानते उन भयानक राज़ को जिंन्हें जानना आपके लिए बहुत जरुरी है। 


#1 1969 में "Union Carbide Corporation" द्वारा एक कीटनाशको की फैक्ट्री की स्थापना की गई जिसका नाम Union Carbide India Limited (UCIL) रखा गया। और फिर 10 साल बाद 1979 में इसका production plant Bhopal में बनाया गया। 

#2 इस प्लांट में एक प्रकार का कीटनाशक पदार्थ का उद्पादन  किया जाता था जिसका नाम SEVIN था SEVIN एक chemical  उद्पादों की एक brand है  
#3 UCIL को बनाने के लिए  methyl isocyanate (MIC)  नामक  गैस का उपयोग किया जाता है ये गैस बहुत ही जहरीली होतो है जिससे इंसान की जान जाने का भी खतरा भी होता है MIC  को उसे करने के पीछे का मुख्य कारण ये की ये  उद्पादन  की कीमत को कम कर देती है इसलिए इसको उपयोग में लाया गया। 

#4 भोपाल के उस हादसे से पहले कई सवाल सामने आये थे आखिर क्यों हर हादसों में UCIL का नाम शामिल होता  है जी हाँ अपने सही सुना भोपाल से पहले भी ऐसे कई हादसे हुए जिनको जानमुझ अनदेखा किया गया। 1981 मेंphosgene गैस के छीटे  काम के दौरान  बहार निकल गए  क्योकि उस गैस की सुरक्षा वाला ढक्कन किसीने हटा दिया जिसका नतीजा ये हुआ की बहुत सारी  गैस निकल गई और 72 घंटो बाद सभी कर्मचारियों की मौत हो गई 

 #5 उसके बाद जनवरी 1982 एक  और phosgene गैस का रिसाव हुआ जिससे वह के 24 कर्मचारियों को अवगत कराया और उसके बाद उन सभी को अस्पताल में भर्ती किया गया उन कर्मचारियों को किसी भी तरह का आदेश ही दिया गया की वो सुरक्षा कवच की पहने।

#6  उसी साल फरवरी 1982 में   गैस का फिर से रिसाव हुआ लेकिन  इस बार वो गैस MIC थी जिसमे 18 कर्मचारी इसकी चपेट में आये थे और वो सभी इस बात से अवगत थे उसको रोकने का प्रयास भी किया गया 

#7  अगस्त 1982 में एक chemical engineer MIC के संपर्क में गया और उसका 30% शरीर जल गया। और उसी साल अक्टूबर में फिर उस गैस का रिसाव हुआ और उसको रोकने का प्रयास भी किया गया  उसे बारे में भी कर्मचारियों को पहले से पता था 

#8
2 साल में कई बार गैस का रिसाव हुआ और इस बार तो  phosgene, chlorine, monomethylamine, carbon tetrachloride और  MIC सभी गैस एक साथ ही निकलती थी ये सभी बहुत ही भयानक गैस होती है 

#9
इन सभी गैसों के  बार-बार रिसाव होने  के पीछे का मुख्य कारण यही है की वह के सुरक्षा प्रणाली में खराबी गई थी और वह की हर लाइन बहुत ही ख़राब अवस्था में हो गई थी  सुरक्षा में गड़बड़ी 1980 के दसको से हो रही थी जिसके कारण कीटनाशक की मांग में गिरावट आगे थी इस लापरवाही के बाद भी UCIL के उद्पादन  को नही रोक गया बल्कि और ज्यादा मात्रा MIC का उपयोग किया जाने लगा। 

#10
एक पत्रकार राजकुमार केसवानी ने लगातार 4 article को लाया और अपने सभी article में उन्होंने आम जनता होने वाले हादसे के बारे में  सचेत किया।
#11 आये दिन गैस के रिसाव होने की खबरे आती रहती थी और कई कर्मचारियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़  जाता था।  
#12 आखिर वो रात ही गई जब भोपाल को उस भयानक वक्त का सामना करना पड़ा 2-3 दिसम्बर 1984 की रात को पानी का रिसाव हुआ क्योकि उस पाइप मैं पानी को रोकने के लिए जो silp-blind plate थी वो किसीने निकल ली थी जिसके कारण पानी E610 नाम के टैंक में चला गया जिससे कुछ अजीब ही प्रतिक्रिया हुई। उस प्रतिक्रिया को रोकना मुश्किल हो गया था क्योकि उसका दवाब बहुत ज्यादा था 

#13
 स्थिति तब ज्यादा बिगड़ गई जब लोहा उस पाइपलाइन में जा कर पिघल गया और उसका प्रभाव भी बढ़ गया उस टैंक में गैस का प्रभाव 200°C के ऊपर ही पहुँच गया और गैस टैंक से ज्यादा बहार हो गई। 

#14
बस कुछ मिनटों  बाद methyl isocyanate गैस पुरे भोपाल में तेज़ी से फेल गया ये गैस nitrogen, carbon dioxide, monomethylamine, hydrogen chloride, carbon monoxide, hydrogen cyanide और phosgene का मिश्रण थी ऊपर बहुत ही जहरीली थी 

#15
गैस  के रिसाव के कारण बहुत से लोगो ने अपनी आँखे खो दी, किसको को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और धीरे-धीरे कई लोग की जान चली गई। 
आज भी भोपाल के कई लोग में उस हादसे का प्रभाव अभी तक मौजूद  है और कई लोग अभी तक उसकी बीमारी का इलाज करवाते फिर रहे है तो बताइये किसको जिम्मेदार माना जाएगा उन हजारो की जान का। क्या आपको नही लगता अगर समय रहते उस अगर उस गलती को सुधार  लिया होता तो आज ये दिन देखने को नही मिलता 

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