कुछ अनकही और अनसुनी की कहानी मेरी जुबानी: जयललिता(अम्मा)

आपको वो वक्त  याद ही होगा जब महिला सशक्तिकरण का नाम भी सुनने को नही मिलता था लेकिन अगर आप कुछ वक्त पीछे जाये तो आपको महिला सशक्तिकरण का एक रूप जरूर देखने को मिला होगा जिसने समाज को ये बताया की "महिला शक्ति एक ऐसा रूप है जिनको घरो में छुपा कर नही रखना  उनको समाज के सामने लाये और उनकी प्रतिभा को सबके सामने लाये वो देश का रूप बदल कर रख देगी" वो और कोई नही मैं ही हूँ आपकी अपनी जयललिता हूँ कुछ लोग मुझे प्यार से अम्मा के नाम से भी संबोधित करते है 



मैने  समाज से जाति  के भेदभाव को तोड़ कर एक नई पहल समाज के सामने शुरू की। और अपने किरदार को बखूबी निभाया है चाहे वो एक के अभिनेत्री के रूप में हो ,या फिर समाजकर्ता के रूप में। 
वेसे तो आप मेरे  के बारे में बहुत कुछ जानते है लेकिन कुछ ऐसी भी बाते है जिनको आप नही जानते और शायद ही इन बातो को आपने कभी सुना होगा। तो आज मैं आपको बताउंगी अपनी ही कहानी। 

#1 महज 16 साल की उम्र में विधवा?


जी हां...मैं जानती हूँ की ये शब्द आपको सुनने में बहुत अजीब लग रहा होगा। ये वो नही है जो में बोल रही हूँ। इस बात का मतलब कुछ और है मैं   एक अभिनेत्री भी रह चुकी है मेरी  पहली तमिल फिल्म "vennira aadai " थी जब मेरी उम्र महज 16 साल की उम्र ही थी पहली फिल्म में ही  मुझे  काफी कामियाबी मिली उस फिल्म में मेरा  किरदार एक विधवा औरत  का था। 

#2 मजबूर थी फिल्मो की दुनिया में जाने के लिए। 

वो वक्त जब मैं अपनी पढ़ाई में काफी सफलताएं हासिल कर रही थी जब मैंने मेट्रिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था तब मेरी माँ को लगा की उनकी बेटी एक अच्छी अभिनेत्री बनने के सारे गुण है पर मेरी  फिल्मो में कोई रूचि नही थी क्योकि मैं एक रूपवादी महिला थी पर अपने परिवार के दवाब के कारण मुझे  तमिल फिल्मो में अपना कदम रखना पड़ा।  



#3 मेरा पहला प्यार।  


जब मैं  अपनी फिल्मो की दुनिया में कामियाबी पर कामियाबी हासिल कर रही थी उसी दौरान मुझे  एक ऐसे शख्स से मोहब्बत हुई जो पहले से ही शादीशूदा था उनका नाम शोबन बाबु है  मेने उनको सबसे पहले लोगो की भीड़ में देखा था मैं  अपने घर पर थी और मेने  अपने दूरबीन से उनको देखा और बस उसी वक्त से वो मुझे पसंद आगये। 

#4 मैं एक किताबी कीड़ा थी 

वेसे तो आप मेरे बारे में सब कुछ जानते होंगे लेकिन ये तो बहुत कम लोग जानते होंगे की मुझे  किताबे पड़ने का काफी शोक था मैं हमेशा अपने साथ अंग्रेजी की एक किताब रख कर चला करती थी और  जब भी मुझे खाली वक्त  मिलता मैं उसका अध्यन करने लगती थी मुझे  पड़ने के साथ-साथ कहानिया लिखने का भी शोक था 

#5 मुझे कभी पैसे की तलब नही रही। 


मैं हमेशा एक अच्छी  समाज सेविका बनना चाहती थी उसके लिए मुझे राजनीती ही एक मात्र सही रास्ता नजर आया जिसमे मैं रह कर सबकी सेवा कर सकती हूँ जब में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में चुनी गई तभी से मेने यही सोच लिया था की में अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा के साथ निभाऊंगी उसमे किसी भी तरह का स्वार्थ नही रहेगा जब  मुझे पहली बार वेतन मिला तो मेने   कहा की मेरे पास आय के बहुत से स्रोत  है मुझे वेतन की जरूरत नही है पर जब मुझे कहा गया की आपको कुछ तो लेना ही होगा तो मैने  सिर्फ 1 रुपया ही लिया मेरा मकसद हमेशा से ही यही रहा है की में पुरे जी जान से आपकी सेवा करू।  


#6 उम्मीद भी नही की मेरा नाम इतना प्रसिद्ध होगा। 


जी हाँ....... मुझे बिलकुल भी नही यकीन नही हुआ जब मुझे ये पता चला की मेरा नाम guinness book  में लिखा गया है शायद ये बात आप में से बहुत कम लोग जानते हैं अगर नही जानते है तो में आपको जरूर बताना चाहूंगी मेरा नाम इसलिए चुना गया क्योकि मेने एक बहुत ही बड़ी शादी करवाई थी सन 1995 के समय मेने एक ऐसे बच्चे की शादी करवाई थी जिसको मेने अपना बेटा बनाया हुआ था उस शादी में करीब 150000 लोग आये थे शादी एक बहुत ही बड़े मैदान में हुई थी जो पुरे 50 एकड में फैला  हुआ था   

#7 नहीं चाहिए कोई भी आभूषण।

 मुझे कभी कोई साज श्रृंगार का शोक नही था और ही किसी भी आभूषण का में हमेशा से एक साधारण सी महिला बनना चाहती थी एक बार समय ऐसा आया था जब मुझ पर ये इल्जाम लगाया गया था की एक जाँच के दौरान मेरे घर में 800 किलोग्राम चांदी, 28 किलोग्राम सोना, 10000 साड़ीयां बरामद हुई  है उस वक्त मेरे पास कोई भी नही था तब मेने अपने ऊपर लगे उस इल्जाम को हटाया और तब से किसीभी तरह के आभूषण को हाथ नही लगाया  

#8 मेरा व्यवसाय हमेशा अलग ही रहा है। 


एक बार मुझे एक interview के लिए फ़ोन आया था उनका नाम सिमी गरेवाल था वो बहुत ही मशहूर पत्रकार थी जिन्होंने एक बहुत ही बड़ा program रखा था उस वक्त उन्होंने मुझे एक सवाल पूछा तब मेने अपनी जिंदगी की सच्चाई बताई उन्होंने पूछा की आपका फिल्मो से लेकर राजनीती तक का सफर केसा रहा तब मेने  जवाब  दिया की मुझे तो फिल्मो में दिलचस्पी थी  और ही राजनीती से जुड़ने का कोई मन था में तो एक वकील बनना चाहती थी  पर उनको लगा की वकील बनने के लिए  खुद में बहुत कुशलता होनी चाहिए पर मुझेमे कुछ कुछ कमी जरूर थी इस लिए मेने अपना अलग रास्ता अपनाया। 

ऐसी बहुत सी बाते है जो मुझसे जुडी हुई है जिनको आप जानते भी है या नही जानते। आज में आप सबके बीच  नही हूँ लेकिन में ये जरूर दावे से बोल सकती हूँ की मेरी समाज के प्रति जो सोच थी वो आज भी आप सबके बीच  मौजूद है मैंने इस समाज को काफी कुछ दिया है और वो हमेशा आप सबके बीच रहेगा और जो पहल मेने शुरू की महिलाओ के लिए उसको आप लोग हमेशा आगे बढ़ाएंगे    

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