कुछ कहते है ये रंग , सुना है आपने कभी

कुछ कहते है ये रंग , सुना है आपने कभी


घर में उपयोग होने वाले सामानों में किन रंगों का प्रयोग किया जाये इसकी जानकारी हर किसी को नहीं होती। वास्तव में रंगों को उनके प्रभावों व उनसे मिलने वाली प्रेरणाओं को ध्यान में रखते हुए प्रयोग में लाया जाना चाहिये। जीवन में हर तरह के रंगों को प्रयोग में लाकर न केवल भाग्य को बलवान होता है बल्कि इनसे हमे कई तरह की प्रेरणा भी मिलती है।  

हर रंग अपना ही एक अलग महत्व है। लेकिन आज कल इन सबकी उपयोगिता खत्म होती जा रही है। तो क्यों न फिर से रंगों के इस मौसम में, बढ़ाते है रंगों का महत्व और करवाते मनुष्य को इनसे रूबरू। 

वैसे तो सात रंगों के सम्मिश्रण से हजारों रंग बन जाते हैं, लेकिन मनुष्य के शरीर एवं मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले कुछ रंग इस प्रकार हैं-

#1 सफेद

यह रंग पवित्रता, शुद्धता, शांति, विद्या, नीति एवं सभ्यता का प्रतीक है। सफेद रंग के प्रयोग से मन की चंचलता समाप्त होती है। व्यक्ति की सोच सकारात्मक बनती है। सफेद रंग पसंद करने वाला व्यक्ति संयमी, सहनशील व शुद्धता का ध्यान रखने वाला होता है। सात्त्विक विचार का होता है। विद्यार्थियों के लिये यह रंग शुभ फलदायक है।


#2 लाल

लाल रंग ऊर्जा, स्फूर्ति, शक्ति, महत्त्वाकांक्षा, उत्तेजना, क्रोध, पराक्रम, बल व उत्साह का द्योतक है। यह रंग अनुकूल परिणाम, सफलता, संघर्षों से जूझने व खतरों से खेलने में अदम्य साहस प्रदान करता है। यह स्नायु व रक्त की क्रियाशीलता को बढ़ाता है तथा एड्रीनल ग्रन्थि व संवेदी तंत्रिकाओं को उत्तेजित करता है। क्रोधी, चिड़चिड़े व हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को इस रंग के प्रयोग से बचना चाहिये। 

#3 नीला

यह रंग स्नेह, शांति, सौजन्य, पवित्रता, बल, पौरूष और वीर भाव का परिचायक है। नीला रंग व्यक्ति को सत्य भाषी, धार्मिक, धैर्यवान बनाता है। इस रंग में प्रेम-माधुर्य, त्याग, कोमलता, अनुराग और विश्वास के भाव निहित रहते हैं। यह रंग रक्त संचार व्यवस्था को ठीक रखता है। नीले रंग की बोतल में पानी भर कर पीने से एवं इस रंग के अधिकाधिक प्रयोग से हाई ब्लड़ प्रेशर, जोड़ों के दर्द, दमा, श्वांस के रोग, स्नायु तंत्र व आँखों के रोग दूर हो सकते हैं।

#4 पीला

पीला रंग आनन्द, ऐश्वर्य, कीर्ति, भव्यता, सुख, आरोग्यता, एवं योग्यता का परिचायक है। हल्का या मिश्रित पीला रंग दरिद्रता व बीमारी का सूचक है। माँस-पेशियों को मजबूत बनाये रखने व पाचन संस्थान को ठीक रखने के लिये इसका प्रयोग लाभदायक है किन्तु अधिक समय तक इसके प्रयोग से पित्त दोष उत्पन्न हो सकता है। पीला रंग पसंद करने वाले व्यक्ति प्रशंसा के भूखे, बातों को बढ़ा-चढ़ा कर कहने वाले, लोगों को टीका-टिप्पणी पर ध्यान न देने वाले तथा कुछ डरपोक होते हैं।

#5 हरा 

हरा रंग व्यक्ति की राजसी ठाट, गर्वशीलता, अपरिवर्तन और निंरकुश प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है। यह रंग मन को प्रसन्नता, ताजगी, हृदय को शीतलता, सुख-शांति व नेत्रों को ठण्डक प्रदान करता है। हरा रंग पसंद करने वाले व्यक्ति हास्य प्रिय, चंचल, कर्मशील, सक्रिय व आत्म विश्वासी होते हैं। हरे रंग के प्रयोग द्वारा नाड़ी सम्बन्धी रोग, आमाशय, आँतों, वाणी, जिह्वा व लीवर के रोग दूर किये जा सकते हैं।

#6 नारंगी 

नारंगी रंग लाल व पीले रंग का सम्मिश्रण है। यह रोगाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। नाड़ी की गति को बढ़ाता है किन्तु रक्त चाप को सामान्य बनाये रखता है। यह जीवन में उत्तेजना व बल प्रदान करता है। इस रंग को पसंद करने वाले व्यक्ति नर्म दिल, दयालु, एकाग्रता से काम करने वाले तथा धीरे-धीरे मित्रता को विकसित करने वाले होते हैं। ये लोग व्यर्थ वाद-विवाद के झमेले में उलझना पसंद नही करते हैं। नारंगी रंग धार्मिकता, दार्शनिकता, एवं साधना का द्योतक है।

#7 काला 

सभी रंगों के सम्मिश्रण से तैयार काला रंग रंगों की सत्ता को नकारता है तथा विमुखता को व्यक्त करता है। यह रंग बदला, घृणा तथा द्वन्द्व की ओर संकेत करता है। काला रंग पसंद करने वाले व्यक्ति परिस्थितियों के विरूद्ध विद्रोह करने व हार न मानने की क्षमता रखते हैं। न्याय व समर्पण की भावना रखने वाले ये लोग समय आने पर सबको तिलांजलि देने से भी नहीं चूकते। तामसिक प्रवृत्ति का यह रंग सुरक्षात्मक कवच के रूप में भी प्रयोग में लाया जाता है।


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