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रंग और उल्लास के इस त्यौहार की कुछ रोचक बातें

13 मार्च को होली मनाई जाएगी। वैसे भी उमंगउल्लास और खानपान का यह उत्सव दो दिनतक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका जलाई जाती हैजिसे होलिका दहन कहते हैं। होली केदूसरे दिन को धुरड्डीधुलेंडीधुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है। इस दिन लोग एक दूसरे पर रंगअबीर-गुलाल फेंकेते हैं और घर-घर जाकर लोगों को रंग लगाते हैं। 

आइए जानते हैं इस बेजोड़ पर्व से जुड़ी कुछ रोचक बातें


#1 प्रचलित मान्यता के अनुसार यह त्योहार हिरण्यकशप की बहन होलिका के मारे जाने की 
स्मृति में मनाया जाता है। 

#2 भारतीय पंचांग और ज्योतिष के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होली के अगले दिन से चैत्र शुदी प्रतिपदा की शुरुआत होती है और इसी दिन से नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है। इसलिए होली पर्व नवसंवत और नववर्ष के आरंभ का प्रतीक है। 

#3 होली एक बहुत ही पुराना  उत्सव है।  इसका आरम्भिक शब्द रूप होलाका था। पहले यह शब्द भारत में पूर्वी भागों में काफी प्रचलित था।  
#4 प्राचीन काल में होली के दिन यानि फाल्गुन की पूर्णिमा को महिलाओं द्वारा परिवार की 
सुख समृद्धि के लिए पूर्णिमा के चांद की पूजा करने की परंपरा थी। वैदिक काल में इस दिन  नवात्रैष्टि यज्ञ किया जाता था इसे वसंतोत्सव के रूप में काफी हर्ष उल्लास और नए अन्न के साथ मनाया जाता था। 

#5 होली के अवसर पर लोग स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं, जिसमें गुझिया, मालपुआ, दही-बड़ा खास व्यंजन हैं। लोग नाचते गाते हैं और ढोल बजाकर होली के गीत गाते हैं। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को 
भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। 

#6 होली के अवसर पर मथुरा के वृंदावन में अद्वितीय मटका समारोह का आयोजन किया जाता है। समारोह में दूध और मक्खन से भरा एक मिट्टी का मटका ऊंचाई पर बांधा जाता हैं और लड़के
मटके तक पहुंचने के लिए जी तोड़ कोशिश करते हैं। इस आयोजन को जीतने वाले को इनाम भी
दिया जाता हैं।

#7 होली पर भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है। भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले हैंइनकी माला बनाई जाती है, जिसमें सात भरभोलिए होते हैं। इस माला को भाइयों के सिर से अनिष्ट को उतारा जाता है और होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। 
#8 होली  हो और बरसाना के लठमार होली की बात  हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। कृष्ण और 
राधा के प्रेम जुड़ी यहां की होली में नंदगांव के 
पुरूष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं।
 पुरुषों को हुरियार और महिलाओं को हुरियारिन कहा जाता है। जब मस्ती से भरे नंदगांव के 
पुरुषों टोलियां पिचकारियां लिए बरसाना 
पहुंचती हैं तो बरसाने की हुरियारिन महिलाएं 
उनपर खूब लाठियां बरसाती है। वैसे तो हुरियारों को इससे बचना होता है, लेकिन यदि लठ का वार खा भी लिया, तो कोई भी हुरियार उफ़ तक नहीं बोलता, हंसता ही रहता है। 

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