A short story on a sharp-witted crow

नवसवंत्सर का आगमन बासंतीय नवरात्र के साथ

नवसवंत्सर का आगमन बासंतीय नवरात्र के साथ 



हमारी संस्कृति में नववर्ष प्रारंभ चेत्र नवरात्र से ही होता है। ऐसा माना  जाता है की इस दिन ब्रम्ह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। यहाँ नवसवंत्सर English Calendar के अनुसार 28 से शुरू हो चूका था। हम इसको कई सदियो से मानते आ रहे है। आज के इस मॉडर्न समय में आज भी हमारे युवा पश्चिमी दिवसों को बड़ी ही उमग और शिद्दत के साथ मानते है। कही न कही कुछ लोग आज भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहना चाहते है। भले ही उसका तरीका अलग क्यों न हो। लेकिन अपनी संस्कृति और मान्यताओ के साथ जुड़े रहने से हर कोई अपने आप में गर्व महसूस करता है।


#1 ग्रेगेरियन calendar 



सम्राट विक्रमादित्य का राज्यकाल हमारे भारत का स्वर्णिम काल माना जाता है। उस समय राजा शाक्य  को पराजित करके विक्रमादित्य ने विक्रम संवंत  की स्थापना की थी। हमारे सभी अनुष्ठानों, संकल्पों  में जब काल व स्थानों को बोला जाता है, तब विक्रम सम्वंत का वर्ष, मास और तिथि ही बोली जाती है, जो धार्मिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी सर्वमान्य है। विक्रम तिथि 24 घण्टे में कभी भी प्रारम्भ हो सकती है। क्योकि एक तिथि की सबसे कम आयु 19 घंटे और सबसे अधिक आयु 26 घंटे होती है।






#2 नवग्रह के प्रभाव 


नवरात्र में बनने वाला योग बड़ी मात्रा में सौम्य ऊर्जा और शक्ति तो प्रदान करता ही है साथ ही नो दुर्गा और दस महाविधाओं की शक्तिशाली कृपा भी प्रदान होती है, क्योकि नवरात्र में नो गृह का राजा सूर्य, जिसकी परिक्रमा सभी गृह करते है, अपनी मूल दिशा ठीक पूर्व से ही उदय होता है। ऐसे में नवरात्र, नवग्रह के लिए विशेष हो जाती है। अतः नवग्रहों को अनुकूल करने के लिए यंत्र के समक्ष नवग्रहोंका जाप विशेष हो जाता है।





#3 कलश का महत्व 


हर तरह की पूजा आरंभ  होने से पहले हर कोई कलश की स्थापना करता है। कलश की स्थापना ,  शुद्ध मिट्टी और आम के पत्तों  के साथ नारियल रखकर की जाती है। ऐसा माना जाता है की कलश रखने से पूजा में कोई समस्या नही आती। नवरात्र में इसका अलग ही महत्व  होता है। बिना कलश के नवरात्र की पूजा अधुरी मानी जाती है।

#4 काल परिवर्तन के नौ दिन


ये नौ दिन कल और ऋतू परिवर्तन के होते है। जिसका प्रभाव हमारे मन, मस्तिष्क और स्वस्थ पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसलिए लोग सात्विक आहार अपनाते है। वे धार्मिक नियमो का पालन करते है। शरीर की बाहरी शुद्धता के लिए पवित्र वस्तुओं से संपर्क रखा जाता है। और आंतरिक शुद्धि के लिए देवी माँ और अपने ईस्ट देव की उपासना की जाती है।

#5 श्रद्धा वही, तरीका नया


आज का युवा भले ही पारंपरिक तरीके से पूजा और आरधना नही करा पर इंटरनेट के पर मौजूद कई Websites से इन सब से जुड़ा रहता है। भले ही वो सुबह उठ कर पूजा न करे पर मन में श्रद्धा रहती है और कई बार हम युवा को Headphone में धार्मिक संगीत सुनते देखते है। और कुछ अपने Mobile की स्क्रीन पर देवी-देवता की तस्वीर लगा कर रखते है।

#6 हिन्दू नवसवंत्सर की मान्यता


यहाँ गुड़ी का अर्थ विजय पताका होता है। एक मान्यता के अनुसार शलिवाहन नामक एक कुम्हार-पुत्र ने मिट्टी  के सेनिको की सेना बनाई और उस पर पानी छिड़कर उस पर प्राण फूंक  दिए और इसकी मदद से शक्तिशालीशत्रुओं  को पराजित किया गया।  इस विजय के प्रतिक के रूप में शालिवाहन शक का प्रारंभ हुआ।

Tags:- Hindi ArticleNavratri SpecialLaw Of Attraction, Stop Rape, Incredible IndiaHindu Nav varsh 

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