जैन धर्म से जुडी कुछ खास ऐसी बाते जो बाकि सभी धर्मों में है काफी अलग

भारत मात्र एक ऐसा देश है जहाँ पर बहुत से धर्म है। और इन सब धर्मों को मानने वाले लोग भी है। इसलिए भारत को धार्मिक स्थल भी कहा जाता है। यहाँ के सभी धर्म जैसे की हिंदू धर्म, सिख धर्म, जैन धर्म, मुस्लिम धर्म, या ईसाई धर्म, सभी का एक अलग ही महत्व होता है और कई सारे नियम होते है। हर धर्म के अलग नियम, कानून, पहचान, पहनावा और शिक्षा होती है।

 तो क्यों आज एक ऐसे धर्म के बारे में जाना जाये, जिनके धर्म के नियम सबसे अलग और कठोर माने जाते है। जी हाँ में बात कर रही हूँ जैन धर्म किए बारे में जिनके बारे में आखिरतर  लोग सब कुछ जानते है और कुछ लोग इनका मजाक भी  बनाते है पर इनके पीछे के कारण को जानकर आपका भी धर्म नाम पर विश्वास बढ़  जायेगा। 

जैन धर्म से जुडी कुछ ऐसी बाते जिनसे लोग जुड़े तो है पर तब भी अनजान है। 


#1 जैनमुनियों का मानना है की सभी इस दुनिया के सभी जीवित प्राणी जैसे इंसान, जीव-जंतु या छोटे मोटे  कीड़े मकोड़े और पेड़-पौधों इनसभी की आत्माये होती है और ये सैद्धान्तिक रूप से सिद्ध हो चूका है की सभी आत्माये निर्वाण की क्षमता रखते है। 


#2 जैन लोगो का हमेशा से एक सिद्धान्त रहा है की "जैन धर्म का अस्तित्व हमेशा से रहा है और आगे भी रहेगा। हमने किसी भगवन को नही बनाया है और ही किसी इंसान को, अगर किसी को हमने अपने धर्म को अपनाने को कहा है तो वो बस  मुक्त आत्मो से कहा है" ऐसा सिर्फ इसलिए कहा जाता है क्योकि जैन धर्म के खिलाफ बहुत लोग बहुत कुछ गलत बोलते है। 

#3 जैन धर्म का कर्म हमेशा से यही रहा है की वो अपने इंसान को उसकी आत्मा से जोड़े रखे। कर्म को लेकर हर कोई जिंदगी में सफर कर रहा है पर कर्म इंसान को कोई सजा नही देता, ये सब हमारे शब्द और कर्मो का नतीजा होता है। 

#4 जैन धर्म का मानना है की इस पुरे बह्रामंड में बहुत कम क्षेत्र धर्मो पर भरोसा करते है अगर हम अपनी आत्माओ से जुड़े रहे तो हम फिर से किसी भी एक धर्म से जुड़ सकते है। 

#5 जैन धर्म के लिए स्वास्थिक के लिए का मतलब बहुत अलग होता है। इसमें जो चार बिंदु होते है उनका मतलब चारों  दिशा और इस दुनिया में रहने वाले हर जीवित प्राणियों से है जैसे इंसान, स्वर्गी प्राणी, पेड़-पौधे और जीव-जन्तुओ  


#6 जैन धर्म के चिन्ह का भी बहुत गहरा मतलब होता है यहाँ चिन्ह बह्रामंड के नियम का मतलब बताता है। सबसे ऊपर से लेकर निचले चिन्ह का अर्थ मोक्ष और देवलोक से होता है, बीच  का हिस्सा धरती का मार्ग बताता है। ये सब वो जब आत्मा शरीर से अलग होती है तो उसके लिए ये तीन रस्ते होते है जिनमेंसे उसे एक राह पर जाना होता है। 

#7 क्या आप जानते है पूरी दुनिया में जैन लोग ही है जो सबसे ज्यादा शिक्षित होते है। 






और कई अन्य बाते भी है जो सिर्फ जैन धर्म के लोगो के लिए नही है बल्कि सभी इंसानो के लिए भी प्रेरणा दया है। हर धर्म का संम्मान कर्मा हमारा कर्तव्य है क्योकि हम भी किसी किसी धर्म से जुड़े हुए है। जो हमेशा एक अच्छी शिक्षा प्रदान करता है। 

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