भूल गए हम अपने शास्त्रों की अहमियत

भूल गए हम अपने शास्त्रों की अहमियत



यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत !अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम !!


आज सवाल हम पर उठा है, सवाल हमारी संस्कृति पर उठा है। कहने को तो हम अपनी संस्कृति को लेकर बहुत बड़ी बड़ी बाते करते है। खुद को बहुत महान और आध्यात्मिक मानते है। पर खुद ही अपने शास्त्रों की बातो को अनदेखा कर देते है और न ही हमारे दिल में अब इनके प्रति कोई इज़्ज़त बची है। एक वक्त था जब हम अपने माँ- बाप से एक झूट भी बोल देते थे तो उसका पछतावा हमेशा हमारे ददिल में रहता था। पर अब एक क्या हम हजारों झूट भी बोल देते है पर हमको कोई फर्क नही पड़ता।
हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत से शास्त्रों का वर्णन किया गया है। जिनके बारे में हम अच्छे से जानते है और भली भांति परिचित भी है। पर क्या हमको इनकी जरा सी भी कदर है। हमसे अच्छे तो दूसरे धर्म और देशो के लोग है जिन्होंने हमारे शास्त्रो को परखा है और पूरी दुनिया में उनका मान बढ़ाया है।
 जी हां..... कई देशो में हमारे पवित्र ग्रन्थ जैसे भगवत गीता उनकी भाषा में बदलकर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। भगवत गीता भारत का एक बहुत पवित्र ग्रन्थ है। जिसकी अहमियत भारत से ज्यादा दूसरे देशों में है।
#1 क्या आप जानते है श्री मद भगवत गीता को अमेरिकन University में पढ़ाया जाता है क्योकि इसमें बोले गए अनमोल वचन और ज्ञान की बात वह के बच्चो तक पहुँचाई  जाती है। ताकि वो एक अच्छा इंसान बन सके और उनके ज्ञान की वृद्धि हो सके, गीता का उपयोग वह मन को शांत रखने के लिए भी किया जाता है।

#2  क्या आप जाते है भगवत गीता सिर्फ हिंदी और संस्कृत में ही नही बल्कि अब हर भाषा में पाई जाती है क्योकि इसकी अहमियत हर किसी को है। और हर अधिकतर लोग इसमें लिखी बातो को मानते है।

#3 अभी हाल की ही बात है गीता को सऊदी अरब में भी Launch किया गया है और इसमें लिखी हर बात का मतलब बहुत बारीकी से बताया गया है।

#4 हम को धन्यवाद करना चाहिए ISKCON जैसे Organizations का जिन्होंने हमारे सबसे पवित्र ग्रंथ भगवत गीता को लगभग 150 Countries तक पहुँचाया।

और ऐसे कई बाते है जो आपको हैरान करके रख देगी। और सिर्फ गीता ही नही हिन्दू संस्कृति से जुड़े सभी ग्रन्थ को कई देशो में सम्मान के साथ उपयोग में लाया जाता है।

गीता भारतीय संस्कृति की पवित्र ग्रन्थ है । हिन्दू शास्त्रों में गीता का सर्वप्रथम स्थान पर है । गीता में 18 पर्व और 700 श्लोकहोते है  । इसकी रचना  वेदव्यासजी ने की थी । 
लोकप्रियता में इससे बढ़कर कोई दूसरा ग्रन्ध है ही नहीं।  और इसकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती ही  जा रही है । गीता भारतीय संस्कृति की एक विशेषता है ।

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