भगवान शिव की बहन- देवी असवारी

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जब भी बात पुराने देव पुराणों या प्राचीन ग्रंथों की होती है तो हम उन्हीं बातों पर यकीन करते है जो हम सुनते है या जिन्हे हम देखते है। भारतीय Mythologies के अनुसार भी यही कहा गया है की हम सिर्फ उन्हीं कहानियों पर यकीन करते है जिनके बारे में सिर्फ हमने सुना है जो असल में मौजूद भी नही है।

वैसे तो हम भारतीय ग्रंथो और पुराणों में लिखी हर कहानी के बारे में जानते है लेकिन असल में कहानी यहाँ खत्म नहीं होती, जरुरी नही की जो कहानी हमे सुनाई गई है वही सच हो। हर कहानी के पीछे एक ऐसा पहलु भी छुपा होता है जिसका वर्णन ग्रंथो में किया तो गया है पर कोई उस पर रूचि नहीं लेता और न ही कोई उन छुपे हुए पहलु पर बात करता है।


जैसे एक पहलु भगवान शिव की कहानी से भी जुड़ा हुआ है। भगवान शिव की कहानी से हर कोई अच्छे से वाकिब है पर शायद ही कोई इस बात से वाकिब होगा की उनकी एक बहन भी थी......
जी हाँ....... भगवान शिव की एक बहन भी थी जिनका नाम देवी असवारी है। कई सारे सवाल भी उठाये गए की जिनका का अस्तित्व जन्म और मरण से परे है उनकी बहन कैसे हो सकती है?
लेकिन अगर हम शिव पुराण की बात करे तो यहाँ बात सही मानी जाएगी है, देवी असवारी ही शिव जी की बहन है जिन्हें उन्होंने अपनी पत्नी माता पार्वती के कहने पर बनाया था।

अजीबो गरीब जन्म की कहानी


बात उस वक्त की है जब महादेव और माता पार्वती की शादी हुई थी। कहा जाता है जब माता पार्वती कैलाश पर रहने आई तब वो अपने परिवार के सदस्यों का बहुत याद करती थी खासकर अपनी बहनो को।  उनको एक ऐसी साथी चाहिए जिसके साथ वो बाते कर सके और अपना दिन व्यतीत का सके, उनकी ये बात सही भी थी क्योकि कैलाश पर सभी आदमी रहते थे वो अकेली ही महिला थी जिसके कारण वो खुद को अकेली महसूस करती थी। अपने मन की बात पार्वती जी ने शिव जी के सामने रखी|  शिव जी ने उनको समझाया की वो बाकि की देवीयों  के पास जा सकती है पर पार्वती जी ने उनकी एक भी नहीं मानी और बोली की उनको एक ननद चाहिए, तब जा कर शिव जी को कुछ नहीं पता था की वो कैसे एक स्त्री लाये फिर उन्होंने अपनी माया से एक स्त्री का निर्माण किया और उनका उन्होंने असवारी रखा|

बाकि स्त्रीयों से अलग थी देवी असवारी


#1 जब भगवान शिव ने एक स्त्री को बनने के बारे में सोचा तो उनको समझ नहीं आया की वो कैसे बनाये, तब उन्होंने खुद की तरह ही एक स्त्री रूप बनाया|

#2 शिव पुराण के अनुसार देवी असवारी का रूप बहुत अजीब था, उनका शरीर मोटा था, लंबे और खुले हुए बाल, फटे हुए पैर, शरीर पर कुछ नहीं पहना हुआ, और जानवरों जैसी त्वचा|

#3 पार्वती जी अपनी ननद को देख कर बेहद ही खुश हुई उन्होने अपनी ननद को नए कपडे दिए|

#4 देवी असवारी ने पार्वती से कहा की उनको भूक लगी है , उनको कुछ खाने को दे| तब पार्वती जी ने उनके लिए भोजन तैयार किया और असवारी को दिया, देवी असवारी ने  ओर भी ज्यादा भोजन माँगा, देवी पार्वती जी न सब दे दिया, और ऐसे ही पुरे कैलाश का सारा भोजन देवी असवारी ने खा लिया, तब भी उनकी भूक नहीं मिटी|

#5 देवी असवारी की भूख को शांत करने के लिए जब माता पार्वती शिव जी के पास जा रही थी तो वो रास्ते में गिर गई तब देवी असवारी ने उनके साथ शरारत की, देवी असवारी ने पार्वती जी को अपनी फटी हुई एड़ी में छुपा लिया|

#6 जब भगवान शिव ने देवी असवारी से पूछा की पार्वती कहा है तब उन्होंने झूठ बोलै की वो नहीं जानती, तब शिव जी ने उन्हें चेतावनी दी, तब जा कर देवी गुस्से में आकर देवी असवारी ने अपने पैर को जोर से जमीन पर पटका, उसी वक्त माता पार्वती उनकी एड़ी से निकल कर जमीन पर जा गिरी|

कैलाश से विदाई


देवी असवारी की इस शरारत से माता पार्वती को बेहद ही गुस्सा आया वो अपनी इस इच्छा पर निराश भी हुई उन्होंने भगवान शिव से उसे सुधारने के लिए कहा, वो अपने व्यवहार में बदलाव लेकर आये, तब भगवान शिव ने उनको समझाया की कोई भी दो अलग घर की महिलाये कभी भी एक साथ खुश नहीं रह सकती, और उसके बाद भगवान  शिव ने देवी असवारी की कैलाश से विदाई कर दी|




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