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Showing posts from March, 2017

नवसवंत्सर का आगमन बासंतीय नवरात्र के साथ

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नवसवंत्सर का आगमन बासंतीय नवरात्र के साथ 

हमारी संस्कृति में नववर्ष प्रारंभ चेत्र नवरात्र से ही होता है। ऐसा माना  जाता है की इस दिन ब्रम्ह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। यहाँ नवसवंत्सर English Calendar के अनुसार 28 से शुरू हो चूका था। हम इसको कई सदियो से मानते आ रहे है। आज के इस मॉडर्न समय में आज भी हमारे युवा पश्चिमी दिवसों को बड़ी ही उमग और शिद्दत के साथ मानते है। कही न कही कुछ लोग आज भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहना चाहते है। भले ही उसका तरीका अलग क्यों न हो। लेकिन अपनी संस्कृति और मान्यताओ के साथ जुड़े रहने से हर कोई अपने आप में गर्व महसूस करता है।

भूल गए हम अपने शास्त्रों की अहमियत

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भूल गए हम अपने शास्त्रों की अहमियत

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत !अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम !!
आज सवाल हम पर उठा है, सवाल हमारी संस्कृति पर उठा है। कहने को तो हम अपनी संस्कृति को लेकर बहुत बड़ी बड़ी बाते करते है। खुद को बहुत महान और आध्यात्मिक मानते है। पर खुद ही अपने शास्त्रों की बातो को अनदेखा कर देते है और न ही हमारे दिल में अब इनके प्रति कोई इज़्ज़त बची है। एक वक्त था जब हम अपने माँ- बाप से एक झूट भी बोल देते थे तो उसका पछतावा हमेशा हमारे ददिल में रहता था। पर अब एक क्या हम हजारों झूट भी बोल देते है पर हमको कोई फर्क नही पड़ता।

रेप करने की सबसे प्यारी सजा

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रेप करने की सबसे प्यारी सजा आज की बात उन महान लोगो के लिए है  जो बलात्कार जैसी घटनाओं  को अंजाम देते है। जिनके लिए Women Safety, Women Empowerment, Stop Rape जैसे शब्द बहुत छोटे है, ये शब्द तो उनको नजर भी नही आते। क्योकि उन लोगो के लिए तो Rape एक बहुत ही प्यारा शब्द होता है जिसको अंजाम देने के बाद वो खुद को महान समझने लगते है। उनकी नजर में वो जो भी करते है वो सब सही है। और न ही उनको किसी का डर है। अगर Rape करना इतना अच्छा है इतना प्यारा है तो उसकी सजा भी बहुत प्यारी और अच्छी होगी। कही सुना था की "अच्छे काम का नतीजा भी अच्छा होता है।" तो क्यों न आज ये देखे की Rape करने के नतीजे कैसे है। 
कही सुना है की ये सजाएं कही हद तक सच भी साबित हुई है। और ये इतनी प्यारी है की आप भी हैरान हो जायेंगे। 
#1 अन्धाताम्त्र्स्म(आँखें निकाल लेना) ये सजा उन लोगो के लिए होती है जो लड़कियों को गन्दी नजरो से देखते है, या जिनकी पत्नी होने के बाद भी किसी और लड़की पर बुरी नजर डालते है। इस तरह की सजा में इंसान के हाथ बांध कर उसकी आँखे निकाल ली जाती है। और उसके बाद उसको तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है। मेरे ख…

भारतीय संस्कृति की असली पहचान:-हिन्दू कैलेंडर(विक्रम संवत)

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भारतीय संस्कृति की असली पहचान:-हिन्दू कैलेंडर(विक्रम संवत)
क्या आप जानते है की आज से भारत में नए वर्ष का आगमन हो चूका है। कुछ लोगो को तो ये सब बहुत अजीब लग रहा होगा की आज नव वर्ष कैसे हो सकता है, लेकिन जो लोग आज के इस दिन से परिचित है वो इस दिन का महत्व अच्छे से जानते होंगे।  
भारतीय मान्यताओ के अनुसार आज यानी 28 मार्च 2017 से विक्रम संवत् 2074 का आरंभ हो चूका है। यहाँ सब हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ही तय होता है। कुछ लोगो को शायद हिन्दू कैलेंडर की भली भांति जानकारी होगी, लेकिन भारत में कुछ लोग ऐसे भी है जिनको इन सब के बारे में कुछ नही पता है। आपको इन सब बातो की जानकारी जरूर होनी चाइये क्योकि ये सब आपसे ही जुड़े है। 
आइये आज आपके सामने भारतीय इतिहास के हिन्दू केलेंडर का विस्तृत ज्ञान रखा जाता है।  
हिन्दू कैलेंडर:इतिहास 
भारतीय हिन्दू कैलेंडर ईसवी सन् के अनुसार चलता है। इसलिए आजकल ये नए पीढ़ी वाले लोग ये सब याद नही रख पाते और न ही उनको विक्रम संवत के बारे में पता होता है जो हमारी संस्कृति और धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये तो हम सब जानते है की हमारे भारत पर अंग्रेजो  ने काफी समय तक राज किया।…

एक और 'पा' ,एक दिन का अध्यक्ष

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एक और 'पा' ,एक दिन का अध्यक्ष
Bollywood के महानायक की सभी फिल्में  एक से बढ़ कर एक रही है। लेकिन उनकी एक ऐसी फिल्म जो हर किसी के लिए बेहद ही खास रही, जिसने हर किसी के दिल में जगह कर ली थी। अब कई सालो बाद उस फिल्म की याद हर किसी को आ गई जब हर किसी के सामने 'पा' का वो चेहरा सामने आया है। उसका चेहरा किसी Makeup Artist ने नही बनाया। ये कोई बॉलीवुड का कलाकार नही बल्कि असल जिंदगी का इंसान है। जिसका चेहरा, बॉलीवुड के अमिताभ बच्चन की फिल्म 'पा' से मिलता है। 

कहाँ गई सिनेमा घरों की वो पुरानी रौनक

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कहाँ गई सिनेमा घरों की वो पुरानी रौनक 100 करोड़केक्लबमेंफिल्मोंकीबढ़तीसंख्याऔरकमाईकेटूटतेरिकॉर्डकेबीचएकतल्खसच्चाईयहहैकिदेशमेंसिनेमाउद्योगकीवृद्धिदरधीमीहुईहै।इसकीबड़ीवजहयहहैकिफिल्मदेखनेसिनेमाहालजानेवालेलोगोंकीसंख्यामेंगिरावटआरहीहै।इसकीवजहोंमेंमनोरंजनकेअन्यसाधन, महंगेटिकट, टीवीपरफिल्में, अच्छीफिल्मोंकीकमीजैसेकईकारणशामिलहैं।इनकारणोंसेबीतेकुछदशकोंमेंफिल्मोंसेकमाईतोबढ़ीहै, लेकिनदर्शकघटेहैं।दिलचस्पयहहैकिइसीअनुपातमेंदेशमेंवीडियोकेअन्यविकल्पोंमेंदर्शकोंकीहिस्सेदारीबढ़रहीहै।दफेडरेशनऑफइंडियानचैंबर्सऑफकॉमर्सएंडइंडस्ट्रीनेदर्शकोंकेव्यवहारऔरइंडस्ट्रीकेमौजूदा

रहस्यमय मंदिर और उनकी अनोखी कहानियां

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रहस्यमय मंदिर और उनकी अनोखी कहानियां
पहले के समय में जब मंदिर बनाए जाते थे तो वास्तु विज्ञान के आधार पर बनाये जाते थे। या कभी राजा-महाराजा अपने खजाने कोछुपाने के लिए उसके ऊपर मंदिर बना देते थे और एक ख़ुफ़िया रास्ता भी बनाया जाता था जिससे खजाने तक पहुँचा जा सके। पर क्या आप जानते है भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनका न तो वास्तु से कोई लेना देना है, न ही किसी राजा के खजाने से, कुछ ऐसे मंदिर जिनका रहस्य आज भी छुपा हुआ है। आइये जानते है उन मंदिरो की कहानियां और उनका रहस्य।

यहाँ है ईश्वर के अनेक रूप

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यहाँ है ईश्वर के अनेक रूप 

भारत मात्र एक ऐसा देश है जहाँ अनेक धर्म है और इन सभी धर्मो को मानने के लिए अलग-अलग आकृतियो को पूजा जाता है। यहाँ ईश्वर का कोई एक रूप नही है। ईश्वर का असली रूप क्या है ये तो कोई भी जनता ही नही है। आखिर ये सब आकृतियां कहा से आई है, किसने इनका निर्माण किया है और आखिर इन्हें पूजा क्यों जाता है। इन सभी सवालो के जवाब आज हम जानेंगे।

#1 ब्रह्माण्ड की कहानी
ब्रह्मांड या सृष्टि में विभिन्न रूपों व आकृतियों का एक संग्रह पाया गया है। सभी मौजूद  ग्रह, तारे, सब कुछ, ये सभी एक आकृतियां का रूप ही हैं। कभी-कभी ये आकृतियां प्रभावशाली आकृतियों में बदल जाती हैं और हमारे हम इन पर भरोसा करने लगते है और जैसा हम इनको मानते है वो वेसे ही हमे दिखने लगती हैं। इसका कारण यह है कि इन सबके बारे में हमने कई बाते सुनते आये है। यह सब अचानक नहीं हुआ है, हर आकृति को बनने  में कई बडा समय लगा है। अगर कुछ आकृति इंसानी क्षमताओं से आगे निकल जाए, तो हम उसे ईश्वर का रूप दे देते हैं, क्योंकि जो भी हमारी क्षमताओं और गुणों से आगे है, वह हमारे लिए ईश्वर बन जाता है। 

भूत प्रेत की आड़ में छिपे मानसिक रोगी

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भूत प्रेत की आड़ में छिपे मानसिक रोगीऐसाअपनेकितनीबारदेखाहै।कभीकभीकुछमंदिरोंमेंलोगअजीबसीशारीरिकहरकतेंकरतेहुएमिलतेहैं।कहाजाताहैकिउन्हेंभूतप्रेतनेवशमेंकरलियाहै।लेकिनऐसामानसिकरोगियों के साथ भीहोसकताहै।  तो आखिर हम कैसेपतालगायेइनदोनोंकेअंतरकेबारेमें ? अगरआपभारतमेंकुछखासतरहकीदेवीयादेवताओंकेमंदिरोंमेंजाएंगे, तोआपदेखेंगेकिकुछखासत्यौहारों पर याकुछखासदिनोंमेंऐसाहमेशा देखे को मिलताहै।उसदिन वह के देवीयादेवताकिसीको भीअपनेअधिकारमेंले सकते हैं, याकहेंकिउसपर हावी होजातेहैंऔरफिर कुछ भीबोलनाशुरूकरदेतेहैं।

बदलाव की चाह, पर बदलता कोई नही

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बदलाव की चाह, पर बदलता कोई नही हर बार नया साल आता है और हर बदलते सालो में हम अपने आप से कई सारे वादे करते है। पर ऐसा कितना प्रतिशत सच होता है। हम हर नए साल में कुछ नया करने की सोचते है या अपने अंदर की Negativity को Positivist में बदलने की कोशिश करते है। फिर क्यों इंसान अपने इस फैसले से हर बार मुकर जाता है। 
हम बस बैठे-बैठे दूसरों  की गलतियां निकाल सकते है, दूसरों की निंदा कर सकते है पर क्या कभी सोचा है की हम में ही कितनी सारी कमिया है जिनको सुधारना बेहद ही जरुरी है। हम ये तो बोलते है ही की हमारे समाज में ये बदलाव होना चाहिए पर ये क्यों नही सोचते की गलत सोच समाज की नही, समाज में रहने वाले लोगो की है जिनमे से हम भी कही न कही आते है।  हम ये क्यों नही सोचते की जब हम अपनी सोच में सुधार नही कर पाते तो दूसरे लोग कैसे कर लेंगे।
#1 कब बदलेगी सोच? आप अपने आस-पास अत्याचार होते हुए  दखते रहते हैं, लेकिन मदद के लिए कोई सामने नहीं आता है। देश में रेप के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार। भारत में करीब 90 प्रतिशत रेप उनके द्वारा अंजाम  करीब वाले ही देते हैं। सब अपने आपको ज़िम्मेदार नागरिक कहत…

Incredible India-कुछ अनजाने और अनसुलझे से रहस्य

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Incredible India-कुछ अनजाने और अनसुलझे से रहस्य 
कला, संस्‍कृति और इतिहास के लिए दुनिया भर में मशहूर भारत अपने अंदर आज भी कई सारे रहस्‍य समेंटे हुए है। कई सवालों के जवाब देश भर के वैज्ञानिक़ो को अब तक नही मिले। लाख प्रयासों के बाद भी वैज्ञानिक कई अनसुलझी गुथियाँ नही सुलझा पाया हैं। आइयें जानते हैं लोगों के डराने और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बने रहस्‍यों के बारे में।

यहाँ आज भी है भगवानवृंदावन का एक ऐसा मंदिर, जहां रात होने के बाद खुद ही मंदिर का दरवाजा अपने आप बंद हो जाता हैं। यहां रात में रुकने वाले की मौत हो जाती हैं। माना जाता हैं कि है कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा आज भी आधी रात के बाद यहां आते हैं।

जिसके बाद परिसर में ही स्थित रंग महल के कमरे में शयन करते हैं। अंधेरा होने से पहले ही रंग महल में प्रसाद के तौर पर पुजारी माखन और मिश्री रखना नहीं भूलते। इतना ही नहीं सोने के लिए पलंग भी लगाया जाता है। सुबह पलंग देखने पर आपकों पता चल जाता है कि रात में इस पर कोई सोया था।
इसके साथ ही प्रसाद भी दिखाई देता हैं। पुजारी अंधेरा होने से पहले ही मंदिर में ये सब व्यवस्था कर देते हैं। मान्‍यता के अनुसा…